बाग ए बहार बर्बाद ना हो जाए
बोलने का जज़्बा जिंदा रख
गर तू जिंदा है तो
जमीर को भी जिंदा रख।
जहां घना है रात सा अंधेरा
उठा के वहां अब चांद रख
दिनभर चली जहां बाते नफ़रत की तमाम
उस जगह तू बात मोहब्बत की
शाम को रख।
शक्स जिंदा हैं वहीं
जमीर जिसका मरा
सच के साथ होगा खड़ा वहीं
जो झूठ से डरा नहीं...BLK
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दौर जो भी हों,
हम हर दौर में बोलेंगे।
वो अगर बेहरा है तो,
हम ज़ोर से बोलेंगे।
बेशक! तुम दबा दोगे
आवाज हमारी तो क्या,
दबी आवाज़ में भी हम,
बड़े शोर से बोलेंगे।
तुम छिनलो चाए मंच हमारा
आज यहां नहीं बोल सके तो क्या,
कल यही बात हम
कहीं ओर से बोलेंगे।


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