रविवार, 5 जनवरी 2020

काश! प्रेममय हो संपूर्ण धरा: विश्व शांति पर एक मार्मिक हिंदी कविता

प्रेममय हो धरा। New Hindi Kavita । Dharti Kavita

हम इस ब्लॉग पर नई कविता,नई शायरी,गीत, ग़ज़ल और रोचक आर्टिकल्स लिखते हैं। Kavita, shayari,Gajal, हमारा जितना ज्यादा मनोरंजन करती है उतनी ही ज्यादा ज्ञानवर्धक भी होती है।


तो चलिए
दोस्तों आज हम आपके लिए एक नई कविता लेकर आए हैं जिसका शीर्षक है।

काश! प्रेममय हो संपूर्ण धरा: विश्व शांति पर एक मार्मिक हिंदी कविता

आज दुनिया जिस हिंसा,लालच और युद्ध के दौर से गुजर रही है, वहां नफरत की दीवारें ऊंची होती जा रही हैं। ऐसे में एक कवि का मन शांति और समरसता की तलाश करता है। यह कविता मेरी एक छोटी सी कोशिश है, उस 'स्वर्ग' जैसी धरती की कल्पना करने की, जहां इंसान जाति,धर्म,देश,परदेश की सीमाओ से हटकर सिर्फ इंसान बनकर रहे। पृथ्वी पर रहने वाले सभी मनुष्य और अन्य प्राणी आपस मे सद्भाव और प्रेम से रहे |

प्रेममय हो धरा 

New Hindi Kavita 2026

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कविता: काश! प्रेममय हो संपूर्ण धरा

Vishva Shanti New Hindi Kavita 2026 by Bablesh Kumar



काश! प्रेममय हो संपूर्ण धरा।

जीवन हो समरस प्रेम भरा।

ना हिंदू हो ना मुसलमान,     

सब बन जाए केवल और केवल इंसान।

सरहदें अब लहू मांगना बंद करें,

नफरतों के बाज़ार भी अब मंद पड़ें।

जाति,धर्म,देश के नाम पर अब और ना लड़े

सरहदें हटे बेर भाव सब मिटे

धर्म जात पात के सब बंधन कटे। 

शांति, सद्भाव, मैत्रीपूर्ण हो धरा,

काश! प्रेममय हो संपूर्ण धरा।

Hindi Kavita 2026 by Bablesh kumar
Hindi Poem 


नदियों का पानी अब बैर न बहाए,

हवाओं में खुशबू बस भाईचारे की आए।

हर एक बच्चा सुकून की नींद सोए, 

न कोई माँ अपने लाल को जंग में खोए।


अन्न उगाए जो किसान,

उसका सम्मान हो,

हर मेहनतकश का अपना एक आसमान हो


न कोई भूख से तड़पे, न कोई प्यास से मरे,

खुशियों का सूरज हर एक आँगन में उतरे।


ना कोई मजबूर हो ना कोई लाचार हो 

प्रकृति को सब स्वच्छ रखे,

ना कोई बीमार हो 

चारों ओर खुशहाली,

हरियाली हो,

सदा प्रेमरस झरे

ऐसी जन-जीवन प्याली हो।

सुख दुख में साथ निभाए सब 

कोई जेब ना खाली हो|

फल-फूल, धन-धान्य से परिपूर्ण हो धरा,

काश! प्रेममय हो संपूर्ण धरा।


निष्कर्ष (Conclusion): विश्व शांति और प्रेम,सद्भाव ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे यह दुनिया रहने लायक बन सकती है। 

धर्म और जाति से ऊपर उठकर जब हम एक-दूसरे का हाथ थामेंगे तभी ये धरती स्वर्ग बनेगी और मेरी यह कविता सार्थक होगी।

दोस्तों, आपको इस कविता की कौन सी पंक्ति सबसे ज्यादा पसंद आई? 

क्या आपको भी लगता है कि प्रेम ही दुनिया का आधार होना चाहिए?

कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दें और अगर 

कविता अच्छी लगी हो तो नीचे दिए गए WhatsApp बटन से इसे जरूर शेयर करें।

✍बबलेश कुमार
उदयपुर राजस्थान

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I hope आपको मेरी New Hindi Kavita जरूर पसंद आई होगी।

कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।


2 टिप्‍पणियां:

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