रविवार, 19 जनवरी 2020

परीक्षा का कुरुक्षेत्र : पढ़ने के लिए जोश भर देने वाली शायरियाँ

परीक्षा का कुरुक्षेत्र : पढ़ने के लिए जोश भर देने वाली शायरियाँ

परीक्षा केवल कागज़ के पन्नों का खेल नहीं है, बल्कि यह आपके धैर्य, अनुशासन और कड़ी मेहनत की अग्निपरीक्षा है। जब मंज़िल सामने हो, तो ध्यान भटकाने वाली हर चीज़ को पीछे छोड़ना पड़ता है। आज की यह पोस्ट उन विद्यार्थियों के नाम है जो अपनी रातों की नींद और आराम त्याग कर अपने सुनहरे भविष्य की इबारत लिख रहे हैं।

यहाँ ऐसी शायरियाँ दी लिखी गई है जो आपको बिस्तर छोड़कर मेज-कुर्सी तक खींच लाएंगी

 नई प्रेरणादायक परीक्षा शायरियाँ 


1.पढ़ाई में ध्यान

कुछ दिन के लिए सब छोड़ दें
पूरा ध्यान पढ़ाई की ओर मोड़ दे
इस क़दर कर परीक्षा तैयारी
कि सबके रिकॉर्ड तोड़ दे।...BLK

2.समय अनमोल 

आज से एक,नई शुरुआत कर
बेवजह यू वक्त बर्बाद ना कर।
देना है जिस प्रश्न का जवाब कल
उत्तर उसका आज याद कर।..BLK

3.अपनी नाकामी 

होश से हम चलते नहीं
ठोकर लगे तो पत्थर को दोष देते है।
मेहनत मन से पूरी हम करते नहीं
असफल होते है तो
मुकद्दर को दोष देते हैं।..BLK


4. बहानेबाज़ी छोड़ो

नींद का बहाना है, या आलस का घेरा है,
कामयाबी उसी की है, जिसका आज सवेरा है।
 किताबों को दोस्त बना, फिर देख तमाशा,
 तेरी मेहनत के आगे, हर अंधेरा अधूरा है।

2. कलम की ताकत

कलाम को हथियार बना, स्याही को लहू बना दे,
 लिख ऐसी तक़दीर कि पूरी दुनिया को दिखा दे।
 जो हँसते थे आज तेरी खामोश पढ़ाई पर,
 कल अपनी सफलता से उन्हें आईना दिखा दे।

3. समय का महत्व

घड़ी की सुई के साथ, अपनी रफ़्तार बढ़ा ले,
 कल के भरोसे मत बैठ, आज ही कुछ नया पा ले।
बीता हुआ पल कभी लौट कर नहीं आता,
मौका है अभी, खुद को इतिहास में सजा ले।

4. खुद से वादा

भीड़ का हिस्सा नहीं, भीड़ की वजह बनना है,
तुझे अपनी ही बनाई सीमाओं से आगे निकलना है।
मत देख कि दुनिया कितनी आगे निकल गई,
तुझे तो बस खुद के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ना है।

5. रातों का सुकून

आराम की तलब है तो मंज़िल भूल जा,
 पर मंज़िल की चाहत है तो रातों का सुकून भूल जा।
 ये जो जल रही है तेरे कमरे की बत्ती आधी रात को,
यही कल सूरज बनकर तेरी किस्मत चमकाएगी।

6. पत्थर और मुकद्दर

पत्थर को तराश कर ही मूरत बनती है,
संघर्ष करने से ही नई सूरत बनती है।
 बैठ कर रोने से मुकद्दर नहीं बदलता,
मेहनत की चाबी से ही हर बंद किस्मत खुलती है।

7. लक्ष्य पर नजर

अर्जुन सा निशाना लगा, मछली की आँख पर,
 मत डोल अपने पथ से, ज़माने की बात पर।
जब परिणाम आएगा तो शोर खुद-ब-खुद मचेगा,
अभी चुपचाप ध्यान दे, अपनी ही बिसात पर।

8. माता-पिता का सपना

थकी हुई आँखों में एक उम्मीद पलती है,
तेरे माँ-बाप की दुआ तेरे साथ चलती है।
उनके पसीने की हर बूंद का हिसाब देना है,
तुझे इस परीक्षा में सबसे लाजवाब होना है।

9. असफलता का डर

हार के डर से, मैदान छोड़ना कायरता है,
 लड़कर जो जीत जाए, वही तो शूरवीर कहलाता है।
 गलतियों से सीख, और फिर से खड़ा हो जा,
तेरा हर प्रयास तुझे मंज़िल के करीब लाता है।

10. जीत का संकल्प

कल सूरज जब निकलेगा, तो नई बात होगी,
 तेरी कड़ी मेहनत की, एक नई शुरुआत होगी।
हारना नहीं है तुझे, चाहे कितने भी इम्तिहान आएं,
यकीन रख, आख़िरी जीत सिर्फ और सिर्फ तेरी होगी।


निष्कर्ष (Conclusion)

परीक्षा का समय तनाव का नहीं, बल्कि खुद को साबित करने का अवसर है। बबलेश कुमार (BLK) की ये पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि अगर हम पूरी ईमानदारी से मेहनत करें, तो मुकद्दर को दोष देने की नौबत नहीं आएगी। याद रखिये, आपकी मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। आज का त्याग कल के साम्राज्य की नींव रखेगा।

उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक रिकॉर्ड टूट न जाएं!






Bablesh Kumar / BLK

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