बेटी की चीख: देश में ये क्या हो रहा है?
एक मार्मिक कविता
New Hindi Kavita 2026
Hello दोस्तों, आज हम एक ऐसे विषय पर बात कर रहे हैं जिसे सोचते ही रूह काँप उठती है। देश में बढ़ती बलात्कार की वीभत्स घटनाएँ और न्याय मिलने में होती देरी, हमारी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। यह कविता हर उस दर्द और गुस्से की आवाज़ है जो आज हर भारतीय के दिल में है।
देश में दिन ब दिन बढ़ रही बलात्कार की घटनाओं और लचर कानून व्यवस्था व हमारी ढीली न्याय प्रणाली का चित्र प्रस्तुत करती यह दिल को झकझोर देने वाली कविता एक बार जरूर पढ़ें।
देश में मेरे यह क्या हो रहा है।
गली, मोहल्ला, नुक्कड़, चौराहे
हर जगह कोई जालिम उसे घूर रहा है।
और लोग कहते है देश में विकास हो रहा है।
मरे मूल्य, मरी नैतिकता
मानवता का सत्यानाश हो रहा है।
यह विकास नहीं, विनाश हो रहा है।
बेटी बेखौफ दो कदम चल नहीं सकती,
और लोग कहते है देश में विकास हो रहा है।
क्या बेटियां ऐसे ही डर-डर के जिएगी,
कितनी शहजादियां और कफ़न में लिपटेगी?
क्या अब भी सिसकियां
सुनाई नहीं देती
बहरी सरकारों को,
आखिर कब तक दोष दे हम
टीवी और अखबारों को?
मुजरिम, गवाह, सबूत सब मिल गए,
किसका इंतजार है?
फैसला कब सुनाओगे?
अपीलें ही सुनते रहोगे या फांसी पे भी लटकाओगे?
कैन्डल मार्च निकालो या भारत बंद करो
घटनाएं ऐसे रुक नहीं सकती,
जब तक बलात्कार पर
फांसी हो नहीं सकती।
कहाँ सुरक्षित है वो नन्हीं सी जान,
अब तो अपनों पर भी नहीं रहा ईमान।
क़ानून की किताबें कब तक धूल फाँकेंगी,
बेटी की चीखें कब तक दर-ब-दर भटकेंगी?
हवस की आग में मानवता जल रही है,
और सियासत अपनी रोटियां सेक रही है।
हमें मोमबत्ती नहीं, अब मशाल चाहिए,
दरिंदों को मौत, बस हर हाल चाहिए।
देश में मेरे यह क्या हो रहा है।
गली, मोहल्ला, नुक्कड़, चौराहे
हर जगह कोई जालिम उसे घूर रहा है।
और लोग कहते है देश में विकास हो रहा है।
-----------------------------------------------------------------------------------
दोस्तों, यह कविता सिर्फ शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक कड़वा सच है। क्या बेटियाँ वाकई आज़ाद हैं? अगर हमारी बेटियाँ आज भी घर से निकलने में खौफ महसूस करती हैं, तो हमें अपने विकास के नारों पर पुनर्विचार करना चाहिए। यह सिर्फ एक कविता नहीं, हर उस परिवार की चीख है जो इंसाफ की राह तक रहे हैं।
Beti Bachao, Justice, Social Issues, Hindi Kavita
आपकी क्या राय है? आपको इस कविता की कौन सी लाइने सबसे ज्यादा झकझोर रही है ?
क्या आपको लगता है कि सिर्फ कड़े कानून ही काफी नहीं हैं , हमें समाज की सोच बदलनी होगी?
मुझे कमेंट करके ज़रूर बताएं। इस पोस्ट को शेयर करें ताकि यह आवाज़ और दूर तक जाए।
✍️ बबलेश कुमार 📍 उदयपुर, राजस्थान




कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें