बहाने रोज़ यूं बनाया ना करो : गज़ल । New Gajal 2026
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इस ब्लॉग में आज हम आपके लिए एक नई ग़ज़ल
New Hindi Gajal
लेकर आए हैं।
उम्मीद है आपको पसंद आएगी।
नई गज़ल । New Gajal 2026
दिल-ए-आरज़ू जो भी है,
छुपाया ना करो।
दिल के मामले में यूं दिमाग लगाया ना करो।
फुर्सत नहीं या याद आती नहीं
बहाने रोज़ यूं बनाया ना करो
मसला यह है कि तुम तो याद करते नहीं
हमें भी रोज़ यूं याद आया ना करो
चेन से सोने दो हमें भी रातभर
ख्यालों में रोज़ यूं आया ना करो
हमारी ही गली से गुजरते हो क्यूं रोज़
बेचैन दिल को यूं धड़काया ना करो
दोस्ती है या है मोहब्बत,उलझन तो है
राज़ जो भी हो
दिल में यूं दबाया ना करो
दिल के दरिया में एक उफान सा आता है
कातिल अदा से रूबरू यूं मुस्कुराया ना करो
जब भी मिलो सिद्दत से गले लगाओ मकबूल
अदब से हाथ अब यूं मिलाया ना करो।
नजरें चुराकर जाना तो एक आदत है तुम्हारी,
यूं महफिल में देख हमें, नजरें झुकाया ना करो।
माना कि दूरियों ने हमें अब अजनबी कर दिया,
पर गैर समझ कर हमसे यूं नजरे चुराया ना करो।
वफा की राहों में मिलते हैं कांटे हजार यहाँ,
खुद चलकर इन पर, अपना पांव जलाया ना करो।
जो लिख दी है लकीरों ने जुदाई की दास्ताँ,
किस्मत के उन पन्नों को,बार-बार पलटाया ना करो।
ये इश्क है 'बबलेश' कोई खेल नहीं जमाने का,
इसे सरेआम बाजार में, तमाशा बनाया ना करो।
निष्कर्ष:
Bablesh Kumar"दोस्तों, यह गजल महज़ शब्द नहीं, बल्कि दिल के उन अनकहे जज्बातों की एक परछाई है जो अक्सर तन्हाई में हमें घेर लेते हैं। यादें कभी-कभी बोझ बन जाती हैं, पर यही वो धागा है जो हमें अपनों से जोड़े रखता है। उम्मीद है मेरी ये कोशिश आपके दिल के किसी कोने को ज़रूर छुएगी।"
Udaipur Rajasthan
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(मेरी पहली गज़ल)
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