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आओ बच्चो 26 जनवरी मनाए

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आओ बच्चो हम 26 जनवरी मनाए सब मिलकर गीत गणतंत्र के गाए। दशो दिशाओं में गूंजे राष्ट्रगान हमारा, घर घर तिरंगा लहराए। आओ बच्चो हम 26 जन.मनाए। 26जन1950से लागू संविधान हमारा इसी दिन से हम गणतंत्र कहलाए। शांति-प्रेम का प्रतीक बने देश हमारा, बच्चा बच्चा वंदे मातरम् गाए। आओ बच्चो हम 26 जन.मनाए। देश का मान बढ़े,सम्मान बढ़े, जीवन में कर्म ऐसे कर जाए। बात बताई जो संविधान में, उसी प्रेम भाईचारे को हम अपनाए। आओ बच्चो हम 26 जन.मनाए। भारत मां के सच्चे बेटे बनकर सबको समरसता का पाठ पढ़ाए। जाति धर्म के भेद मिटाकर हम सबको गले लगाए। आओ बच्चो हम 26जन.मनाए। जय हिन्द..वंदे मातरम् बबलेश कुमार✍🙏🏻

परीक्षा शायरी...exam shayari

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कुछ दिन के लिए सब छोड़ दें पूरा ध्यान पढ़ाई की ओर मोड़ दे इस क़दर कर परीक्षा तैयारी कि सबके रिकॉर्ड तोड़ दे।...BLK __________________________ आज से एक,नई शुरुआत कर बेवजह यू वक्त बर्बाद ना कर। देना है जिस प्रश्न का जवाब कल उत्तर उसका आज याद कर।..BLK ___________________________ होश से हम चलते नहीं ठोकर लगे तो पत्थर को दोष देते है। मेहनत मन से पूरी हम करते नहीं असफल होते है तो मुकद्दर को दोष देते हैं।..BLK Bablesh Kumar / BLK

जिंदगी

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कभी सवर जाती हैं कभी बिखर  जाती हैं। कभी धुंधली होती हैं बहुत तो कभी निखर जाती हैं। कुछ यादें बनती हैं हसीन कुछ दर्द भरी रह जाती हैं। कुछ उम्रभर साथ चलती है कुछ बहुत पीछे  छूट जाती है। यह जिंदगी है जिंदगी , आहिस्ता आहिस्ता गुजर जाती हैं। zindagi kavita सुख दुख की कश्मकश में  भागती है बहुत तेज़ फिर भी वक्त से  पीछे रह जाती हैं। यह वो कहानी है जिसका पूर्व निर्धारित कोई अंत नहीं। जी भर के जी लो फिर भी ख्वाहिश अधूरी रह जाती हैं। इंसान चले जाते है बस यादें रह जाती है यह जिंदगी है जिंदगी  आहिस्ता आहिस्ता गुजर जाती हैं। जिंदगी सांस हैं, जो सबसे खास है। प्रतिपल जीने की आस है। कभी संघर्ष में संवरती है कभी सफलता में  और निखरती है। बचपन में मचलती है जवानी में धधकती है तो बुढ़ापे में सिसकती है। गिरती है,उठती है, कई बार फिसलती हैं। यह जिंदगी हैं जिंदगी आहिस्ता आहिस्ता गुजर जाती हैं। जिंदगी है जिंदादिली फिर खुद को  साबित करने में  झूट जाती हैं। यह किसी कलाई की चूड़ी नहीं जो  एक बार चटकने से टूट जाती ...

खुशियां ढूंढने चले थे...BLK

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खुशियां ढूंढने चले थे मुसीबतों से मुलाकात हो गई। मेरा ही घर छूटा सारे शहर में बरसात हो गई। कल तक तो छोटी ही थी मेरे सामने खड़ी है अब उम्र के साथ में ही बड़ा नहीं हुआ मेरी मुसीबतें भी बड़ी हो गई।

शक्स जिंदा है वहीं

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हजारों मिलती हैं एक जगह, तब यह मंज़र बनता हैं। एक अकेली नदी से कभी  समन्दर नही बनता। गिरकर भी हौसला उठने का  रखना दोस्त, क्योंकि एक हार से कोई फकीर  और एक जीत से कोई  सिकंदर नहीं बनता।✍BLK ©bableshkumar ------------------------------------- शक्स जिंदा हैं वहीं   जमीर जिसका मरा सच के साथ होगा खड़ा वहीं जो झूठ से डरा नहीं...BLK _____________&_________ दौर जो भी हों, हम हर दौर में बोलेंगे। वो अगर बेहरा है तो, हम ज़ोर से बोलेंगे। बेशक! तुम दबा दोगे आवाज हमारी तो क्या, दबी आवाज़ में भी हम, बड़े शोर से बोलेंगे। तुम छिनलो चाए मंच हमारा आज यहां नहीं बोल सके तो क्या, कल यही बात हम कहीं ओर से बोलेंगे ।

खता -ए- मोहब्बत

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वफ़ा हम आज भी इस क़दर निभा रहे हैं। तुम्हारी यादों का बोझ, दिल से उठा रहे हैं। खता-ए-मोहब्बत, मिलकर की थी दोनों ने। मगर दर्द हम अकेले उठा रहे हैं।...BLK __________&___________ गुज़रे जिसके साए में  जिंदगी सारी। ऐसी सोहबत डूंढ़ रहा हूं। मेरी नादानी तो देखो , दौर -ए-नफ़रत में मोहब्बत डूंढ़ रहा हूं।

तेरी नज़र का तीर ऐसे पार हो गया

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तेरी नज़र का तीर ऐसे पार हो गया मैं सलामत ना रहा, शिकार हो गया ख्यालों में आ के सताया मुझे उसने मैं हकीकत में आज बेकरार हो गया। तेरी नज़र का तीर ऐसे पार हो गया मैं सलामत ना रहा, शिकार हो गया तलब तेरी एक अरसे से थी मुझे ओर बड़ गई बेताबी,जो तेरा दीदार हो गया। तेरी नज़र का तीर ऐसे पार हो गया मैं सलामत ना रहा, शिकार हो गया तबीयत जो कलतक तो  अच्छी थी मेरी, हाल पूछा जो उसने आज मैं बीमार हो गया। बाग़-ए-वीरान था मैं जाने कबसे, छुआ जो उसने आज मैं गुल-ए-गुलजार हो गया तेरी नज़र का तीर ऐसे पार हो गया मैं सलामत ना रहा,शिकार हो गया। बबलेश कुमार उदयपुर मेरी दूसरी गज़ल - उम्मीद है पसंद आएगी आपको🙏🙏